धरोहर _ वीरेंद्र मिश्र
धरोहर _ वीरेंद्र मिश्र
हम भी भूखे , तुम भी भूखे
दोनों में लेकिन बड़ा फर्क है
हम रोटियों के , तुम कुर्सियों के ,
क्या है हकीकत , क्या तर्क है
हम सिर्फ जल हैं , तुम सोमरस हो,
हर पात्र को यह मालूम है
तुम जी रहे हो , वो स्वर्ग है
पर , हम जी रहे जो वो नर्क है _ *****
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