dharm se moksh
गुरुवार, 8 अगस्त 2013
संतोष एवं अपरिग्रह
संतोष एवं अपरिग्रह
"साईँ इतना दीजिये जामें कुटुंब समाये। मैं ना भूखा रहूं और साधू भूखा ना जाए।
"
संतोष एवं अपरिग्रह ही परम धर्म है। संग्रह से बचने का प्रयास करना चाहिए। ******
1 टिप्पणी:
devendra hitkari
11 अगस्त 2013 को 10:50 am बजे
guruji, humne apne ghr ka naam aprigrah rakh lia hai.... dhanywaad
जवाब दें
हटाएं
उत्तर
जवाब दें
टिप्पणी जोड़ें
ज़्यादा लोड करें...
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
guruji, humne apne ghr ka naam aprigrah rakh lia hai.... dhanywaad
जवाब देंहटाएं